गुरु चरणां विच हो अर्पण लिरिक्स हिन्दी में

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1 फरवरी 2022 को प्रकाशित यह निरंकारी गीत/ भजन गुरु चरणां विच हो अर्पण के लिरिक्स हिन्दी में अब जस्ट लिरिक्स पर उपलब्ध है इस निरंकारी गीत के लिरिक्स आदर्श कुमार जी ने लिखे है और इस गीत को सुधिता जी ने गाया है

निरंकारी गीत / भजन की जानकारी

क्र.सं.विषयजानकारी
1गीत/भजन का नामगुरु चरणां विच हो अर्पण
2गायकसुधिता जी
3लेखकआदर्श कुमार जी
4प्रकाशन दिनांक1 फरवरी 2022
5copyrightसन्त निरंकारी मिशन

निरंकारी गीत/ भजन गुरु चरणां विच हो अर्पण की वीडियो

निरंकारी गीत गुरु चरणां विच हो अर्पण लिरिक्स हिन्दी में

मनां तू कर सेवा सिमरण
गुरु चरणां विच हो अर्पण
मनां तू कर सेवा सिमरण
गुरु चरणां विच हो अर्पण
हो प्रीतां ला लै सच्चियाँ
गुरु चरणां विच ने खुशियाँ
हो प्रीतां ला लै सच्चियाँ
गुरु चरणां विच ने खुशियाँ
असीं वी बणिये एहदे अनमोल रतन
मनां तू कर सेवा सिमरण

प्यार वंडदे ही जाइए
सोहणे कर्म कमाइए
मन्न के एहनू रू-ब-रू
सदा झुक के है रहणा
संता विच बहणा
जप्प तूही तूही तू
मनां तू कर सेवा सिमरण
गुरु चरणां विच हो अर्पण
मनां तू कर सेवा सिमरण
गुरु चरणां विच हो अर्पण

गुरमत ही सवारे
मनमत तां बिगाड़े
मन्न गुरु दी ही तू
सदा हुकम च ए रहणा
सात्वचन ही कहणा
बण जा संत हू-ब-हू
मनां तू कर सेवा सिमरण
गुरु चरणां विच हो अर्पण
मनां तू कर सेवा सिमरण
गुरु चरणां विच हो अर्पण

एह परिवार दिता
एन्ना प्यार दिता
नच्चे खुशी विच रूह
आओ जग महकाइए
ख़ुशी बंडदे ही जाइए
होवे सुख़ हर सू
मनां तू कर सेवा सिमरण
गुरु चरणां विच हो अर्पण
मनां तू कर सेवा सिमरण
गुरु चरणां विच हो अर्पण
हो प्रीतां ला लै सच्चियाँ
गुरु चरणां विच ने खुशियाँ
हो प्रीतां ला लै सच्चियाँ
गुरु चरणां विच ने खुशियाँ
असीं वी बणिये एहदे अनमोल रतन
मनां तू कर सेवा सिमरण

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